ये पांच कविताएं,जो आपके मनोबल को बढ़ा देंगी

प्रेरक प्रसंग, हिंदी

कोरोनावायरस ने जिस तरह से भारत के साथ ही पूरे विश्व भर में तबाही मचाई है,उसके खिलाफ जंग जीतने के लिए हम सब को एक साथ मिलकर लड़ने की जरूरत है। इस महामारी के दौर में हमें ज्यादा से ज्यादा घर में रहने की जरूरत है और ऐसे में खुद के मनोबल को बनाए रखना लोगों के लिए काफी कठिन है। आज हम बात करने वाले हैं कुछ ऐसी कविताओं के बारे में जो कोरोना के इस संकट में हमारे मनोबल को बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।

इसको कोरोना महामारी से लड़ने के लिए जितना जरूरी घर में रहना है, उतना ही जरूरी है घर में रहकर अपने मनोबल को बनाए रखना। ऐसे में मनोबल को बढ़ाकर नई ऊर्जा देने के लिए कवियों का महत्व काफी ज्यादा हो जाता है और उनकी कविताएं हमारे मनोबल को बढ़ाने के लिए काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। आज हम कुछ ऐसी कविताओं के बारे में बात करने वाले हैं जो हमारे मनोबल को बढ़ाकर नई ऊर्जा देने में मदद कर सकती हैं।

इस कोरोना महामारी की वजह से हर किसी कि जीवन में कठिनाइयां आईं हैं, ऐसे में कुमार विश्वास द्वारा लिखी गई यह कविता मनोबल को बढ़ाने के लिए काफी सहायक हो सकती है।

पतझड़ का मतलब

तूफानी लहरें हो, अंबर के पहरे हों

पुरवा के दामन पर दाग बहुत गहरे हों।

सागर के मांझी, मत मन को तु हारना, 

जीवन के इस क्रम में जो खोया उसे पाना है।

पतझड़ का मतलब, फिर बसंत आना है।।

राजवंश रुठे तो राजमुकुट टूटे तो,

सीतापति राघव का राजमहल टूटे तो।

आशा मत हार पार सागर के एकबार,

पत्थर में जान फूंक फिर से सेतु बनाना है। 

पतझड़ का मतलब, फिर बसंत आना है।।

कोरोना के इस दौर में लोगों को अपनों से भी मिलने में डर लग रहा है, ऐसे समय में जब कोई अपना छोड़ कर चला जाता है तो ऐसे में साहस और मनोबल बनाए रखना काफी मुश्किल हो जाता है ऐसे में हरिवंश राय बच्चन की यह कविता हमारे मनोहर को बढ़ा सकती है।

जो बीत गई सो बात गई

जीवन में एक सितारा था, माना वह बेहद प्यारा था

वह डूब गया तो डूब गया ,अम्बर के आनन को देखो

कितने इसके तारे टूटे,कितने इसके प्यारे छूटे

जो छूट गए फिर कहाँ मिले,पर बोलो टूटे तारों पर

कब अम्बर शोक मनाता है,जो बीत गई सो बात गई।

जीवन में मधु का प्याला था,तुमने तन मन दे डाला था

वह टूट गया तो टूट गया,मदिरालय का आँगन देखो

कितने प्याले हिल जाते हैं,गिर मिट्टी में मिल जाते हैं

जो गिरते हैं कब उठतें हैं,पर बोलो टूटे प्यालों पर

कब मदिरालय पछताता है,जो बीत गई सो बात गई।।

कोरोना महामारी जिसने पूरे विश्व भर में तबाही मचाई, और हर बड़े से बड़ा देश इससे लड़ने में असहाय दिखाई पड़ा, चाहे वह देश की सरकारें हों या देश के डॉक्टर्स, जो लोगों को बचाने में लगे हैं, लेकिन कोरोनावायरस हर कदम पर उन्हें चुनौतियां दे रहा है। ऐसे में देश सेवा में लगे उन समाजसेवियों के लिए सोहन लाल द्विवेदी की यह कविता उन्हें नई ऊर्जा देने में मदद कर सकती है।

कोशिश करने वालों की

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,

चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।

मन का विश्वास नशों में साहस भरता है,

चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना नहीं अखरता है।

आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।

महान कवि माखन लाल चतुर्वेदी द्वारा पुष्प पर लिखी गई यह कविता कोरोना के संकट में देश की सेवा में लगे लोगों की मनोबल को बढ़ाने के लिए काफी महत्वपूर्ण है,

चाह नहीं

चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ,

चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ,

चाह नहीं सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ,

चाह नहीं देवों के सिर पर चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ,

मुझे तोड़ लेना बनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक!

मातृ-भूमि पर शीश- चढ़ाने, जिस पथ पर जावें वीर अनेक!

कोरोना के इस संकट काल में मैथिली शरण गुप्त द्वारा भारत देश पर लिखी गई इस कविता को पढ़कर हमें भी इस समय एक साथ मिलकर इस महामारी से मुकाबला करना होगा, और एक दूसरे का साथ निभाकर आगे बढ़ना होगा।

भारत माता का मंदिर यह

भारत माता का मंदिर यह समता का संवाद जहाँ,

सबका शिव कल्याण यहाँ है। पावें सभी प्रसाद यहाँ।

जाति-धर्म या संप्रदाय का, नहीं भेद-व्यवधान यहाँ,

सबका स्वागत, सबका आदर सबका सम सम्मान यहाँ।

राम, रहीम, बुद्ध, ईसा की, सुलभ एक सा ध्यान यहाँ,

भिन्न-भिन्न भव संस्कृतियों के गुण गौरव का ज्ञान यहाँ।

इस संकट काल में उपर्युक्त पांच कविताएं हमारे मनोबल को बढ़ाकर हमें नई उर्जा प्रदान करने में हमारी सहायता कर सकती हैं। हम जिनको पढ़कर अपने मनोबल को बढ़ा सकते हैं और जल्द सब कुछ फिर से सही होगा।

Disclaimer : This article is accurate and true to the best of the author’s knowledge. Content is for informational or education purposes only and does not substitute for personal counsel or professional advice in business, financial, legal, or technical matters

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