Sanskrit

संस्कृत सूक्तियां अर्थ सहित

अप्रियस्य च पथ्यस्य वक्ता श्रोता च दुर्लभ:अर्थ– अप्रिय किंतु परिणाम में हितकर हो ऐसी बात कहने और सुनने वाले दुर्लभ होते हैं। अतिथि देवो भवअर्थ– अतिथि देव स्वरूप होता है। […]

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संस्कृत श्लोक अर्थ सहित | Sanskrit Slokas with meaning

संस्कृत भाषा कभी हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति की मूल और वाहक भाषा रही है. जिसमें हमारे ऋषि-मुनियों ने तथा तत्कालीन समाज के प्रबुद्ध व्यक्तियों ने ज्ञान के सूत्रों को श्लोक […]