PrithiviRaj Chauhan

पृथ्वीराज चौहान

हिंदी, हिंदी निबंध

शब्दभेदी बाण चलाने में सक्षम और राय पिथौरा के नाम से प्रसिद्ध पृथ्वीराज चौहान, चौहान वंश के एक राजपूत राजा के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने भारत के पारंपरिक चाहमान क्षेत्र, सपादलक्ष पर शासन किया, साथ ही उनका नियंत्रण वर्तमान में राजस्थान, दिल्ली और पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के कुछ हिस्सों पर भी था, वह दिल्ली के सिंहासन पर बैठने वाले स्वतंत्र हिन्दू राजाओं में से अंतिम राजा थे।

आरंभिक जीवन

पृथ्वीराज चौहान का जन्म 1166 ईस्वी में अजमेर के राजा सोमेश्वर चौहान के पुत्र के रूप में हुआ था। उनकी माता का नाम कर्पूरी देवी था, जो कि त्रिपुरी के आचार्य राज की पुत्री थीं। पृथ्वीराज बचपन से ही बहादुर और बुद्धिमान थे, बचपन में ही उन्होंने युद्ध करने की कला सीख ली थी। जब वह 11 वर्ष के थे तभी उनके पिता सोमेश्वर की मृत्यु हो गई, जिसके बाद पृथ्वीराज चौहान को 11 वर्ष की उम्र में उनकी मां के नेतृत्व में राजगद्दी पर बैठाया गया। इतिहासकारों के अनुसार 1180 में उन्होंने राज्य का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया, इसके बाद से उन्होंने अपने राज्य के विस्तार के लिए कई अभियानों पर जोर दिया। उन्होंने अपने अभियान की शुरुआत राजस्थान जैसे छोटे राज्यों को जीतकर की, उसके बाद उन्होंने खजुराहो और महोबा के चंदेलों को पराजित किया।दिल्ली में स्थित राय पिथौरा के किले के निर्माण का श्रेय पृथ्वीराज चौहान को ही जाता है।

प्रेम और विवाह

पृथ्वीराज चौहान कन्नौज के राजा जयचंद की बेटी से प्रेम करते थे, लेकिन राजा जयचंद को यह रिश्ता स्वीकार नहीं था क्योंकि पृथ्वीराज उनके शत्रु पक्ष के थे। इस वजह से उन्होंने अपनी बेटी संयुक्ता के लिए एक स्वयंवर की योजना बनाई और उसमें सभी राजाओं को आमंत्रित किया परंतु राजकुमार पृथ्वीराज को आमंत्रित नहीं किया गया। पृथ्वीराज की जगह उन्होंने एक मिट्टी की मूर्ति बनाई और उसे द्वार पर रखवा दिया, जब पृथ्वीराज और संयुक्ता को यह पता लगा तो उन्होंने भागने की योजना बनाई। स्वयंवर के दौरान संयुक्ता ने सभी राजाओं को नजरअंदाज कर मिट्टी के पुतले को वरमाला पहनाई और उसके बाद पृथ्वीराज और संयुक्ता वहां से भागकर दिल्ली चले गए। बाद में उन्होंने गोविंदराज और अक्षय समेत कई बच्चों को जन्म दिया।

मोहम्मद गोरी से युद्ध

1175 में मोहम्मद गोरी ने सिंधु नदी को पार कर मुल्तान पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद 1178 में उसने गुजरात पर आक्रमण किया, लेकिन गुजरात के चालुक्यों ने मोहम्मद गोरी को हरा दिया जिससे गोरी चौहानों पर आक्रमण नहीं कर पाया। जिसके बाद से मोहम्मद गोरी ने कभी भी गुजरात के रास्ते से भारत में प्रवेश नहीं किया, और फिर अगले कुछ वर्षों में उसने पश्चिम के राज्यों पेशावर,सिंध और पंजाब को जीत कर अपनी शक्ति को बढ़ाया और उसके बाद उसने पंजाब को अपना गढ़ बनाया। मोहम्मद गोरी ने अपने राज के विस्तार के लिए अब पूर्व की ओर बढ़ने का फैसला किया, जहां मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच कई युद्ध हुए।

तराइन का प्रथम युद्ध

1190 में मोहम्मद गोरी ने चौहानों के राज्य पर आक्रमण कर दिया और बठिंडा पर अपना कब्जा जमा लिया, जब पृथ्वीराज चौहान को इसकी जानकारी हुई तो वे दिल्ली के गोविंदराजा और अपने सामंतों के साथ निकल पड़े। जब मोहम्मद गोरी को पृथ्वीराज के बारे में पता लगा तो वह लड़ाई के लिए सेना लेकर निकल पड़ा और तराइन के मैदान में पृथ्वीराज और मोहम्मद गौरी का सामना हुआ, जहां चौहानों ने गोरियों को हरा दिया।

तराइन का द्वितीय युद्ध

तराइन के प्रथम युद्ध में हार के बाद गोरी गजनी लौट गया और उसने कुछ महीनों तक अपनी शक्ति को बढ़ाया और एक सेना इकट्ठे की,जिसमें 1,20,000 चुनिंदा अफगान सैनिक और घुड़सवार शामिल थे। सेना इकट्ठे करने के बाद मोहम्मद गोरी मुल्तान और लाहौर होते हुए चौहान राज्य की ओर निकल पड़ा। पृथ्वीराज चौहान ने पड़ोसी राज्यों से शत्रुता होने के बावजूद मोहम्मद गोरी से मुकाबला करने के लिए एक बड़ी सेना इकट्ठा करने में कामयाबी हासिल की। तराइन में हुए इस दूसरे युद्ध में मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को हराया और जब पृथ्वीराज चौहान ने घोड़े पर भागने की कोशिश की तो उन्हें पकड़ लिया गया। जिसके बाद मोहम्मद गोरी ने अजमेर पर कब्जा कर लिया और वहां के मंदिरों को नष्ट कर दिया।

मृत्यु

अधिकांश स्रोतों में यह बताया गया है कि हार के बाद पृथ्वीराज को अजमेर लाया गया, जहां मोहम्मद गोरी ने उसे गोरियों के अधीन राजा बनाने की योजना बनाई। लेकिन पृथ्वीराज ने गोरी के खिलाफ विद्रोह कर दिया, जिसके बाद गोरियों ने पृथ्वीराज को मार दिया।

चंदबरदाई द्वारा रचित पृथ्वीराज रासो में यह बताया गया है कि पृथ्वीराज को कैदी बनाकर गजनी ले जाया गया जहां लोहे के गर्म छड़ों द्वारा उन्हें अंधा कर दिया गया, कवि चंदबरदाई ने जब यह सुना तो उन्होंने गजनी की यात्रा की और मोहम्मद गोरी से बचकर पृथ्वीराज से मिले, यह भी कहा जाता है कि पृथ्वीराज ने चंदबरदाई की मदद से शब्दभेदी बाण चलाकर मोहम्मद गोरी को मार डाला। कुछ समय बाद पृथ्वीराज और चंदबरदाई ने भी एक दूसरे की हत्या कर दी।

पृथ्वीराज चौहान को एक हिंदू योद्धा के रूप में देखा जाता है उन्होंने मुस्लिम दुश्मनों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और उन्होंने भारत के राजनीतिक केंद्र दिल्ली पर शासन किया। महान कवि चंदबरदाई ने अपनी रचना पृथ्वीराज रासो में पृथ्वीराज चौहान के जीवन को वर्णित किया है।

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