कोरोना काल में कैसे रखें अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान ?

जीवन-शैली, सेहत

कोरोना महामारी ने पिछले काफी समय से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा रखा हुआ है, लेकिन भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने भीषण तबाही मचाई है। इस लहर में संक्रमितों की संख्या दिन प्रतिदिन नये रिकॉर्ड बना रही है, और देश में मौत के आंकड़े भी लगातार बढ़ते चले जा रहे हैं, जिसकी वजह से देश में एक भयावह स्थिति बन गई है, और उसका असर लोगों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है।

पिछले 1 साल से कोरोना-वायरस से लड़ रहा हमारा देश इस समय पिछले 10 महीने से कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में है, और दिन प्रतिदिन देश में संक्रमितों के साथ ही मौत के आंकड़े भी बढ़ते जा रहे हैं। कोरोना-वायरस की वजह से लोगों को ना ही अस्पताल में बेड मिल पा रहे हैं और ना ही उन्हें ऑक्सीजन की आपूर्ति हो पा रही है, देश में हर दिन लोग बेड और आक्सीजन की कमी के चलते अपनी जान गवा रहे हैं।

कोरोना कर रहा लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर

डॉक्टरों के मुताबिक कोरोना की यह दूसरी लहर इतनी भयावह है जिसे देखकर लोग भयभीत हो जा रहे हैं इस लहर में लोगों को ना ही कोई आशा की किरण दिखाई पड़ रही है और ना ही बचने का कोई तरीका। ऐसे में जब कोई किसी अपने जानने वाले को परेशान देख रहा है, तो उसका असर सीधे उसके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इस समय देश में लोग इतना ज्यादा घबराए हुए हैं कि उन्हें हर समय कोई बुरी खबर ना आ जाए इसी बात की चिंता बनी रहती है।

ज्यादा करें खुश रहने का प्रयास

डॉक्टरों के मुताबिक जब आपको हर तरफ बस बुरी खबरें ही दिखाई पड़ रही हैं तो ऐसे में लोगों को अपने मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए। हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम ज्यादा से ज्यादा खुश रह सकें, अगर हम किसी से फोन पर बातें भी करते हैं तो हम नकारात्मक बातों की जगह अच्छी बातें ही करें, जिससे हमें उस माहौल में खुशी मिल सके, जो कि हमारे मानसिक स्वास्थ्य को सही रखने में सहायता करेगी। हालांकि इस भयावह स्थिति में खुशी ढूंढ पाना काफी ज्यादा मुश्किल है, लेकिन फिर भी हमें जितना हो सके खुश रहने का प्रयास करना चाहिए।

पॉजिटिव चीजों पर दें ध्यान

महामारी के इस दौर में सबसे जरूरी है कि हम पॉजिटिव चीजों पर ही गौर करें क्योंकि इस समय सोशल मीडिया से लेकर न्यूज़ चैनल पर हर समय भयावह स्थिति देखने को मिल रही है, ऐसे में घर में रहकर हम इन सब चीजों से दूर रहने का प्रयास करें और घबराने की बजाय जो अच्छी चीजें हो रही हैं, उन पर ध्यान दें।

परिवार वालों का भी रखें ख्याल

कोरोना महामारी के इस संकटकाल में खुद को मानसिक तौर पर स्वस्थ रखने के साथ ही परिवार वालों को भी हो रही घबराहट और बेचैनी से बचाने का हमें प्रयास करना चाहिए। डॉक्टरों के मुताबिक यह समय घर में रह रहे बड़े बुजुर्गों के लिए काफी कठिन है इसलिए घर के और लोगों की यह जिम्मेदारी है कि संकट के इस माहौल में हमें अपने परिवार के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना चाहिए। जितना हो सके उतना समय उनके साथ बिताएं और उनसे ज्यादा से ज्यादा बात करने की कोशिश करें, जिससे उन्हें बेचैनी से हम बचा सकते हैं और खुद भी मानसिक तौर पर ज्यादा स्वस्थ रह सकते हैं।

हमें धैर्य के साथ करना होगा मुकाबला

कोरोनावायरस की दूसरी लहर जब देश में पूरी तरीके से पैर पसार चुकी है और दिन प्रतिदिन लोगों को अपनी चपेट में लेती जा रही है तो ऐसे समय में हमें मानसिक तनाव की स्थिति से बाहर निकलना बहुत ही जरूरी है। देश के डॉक्टरों की यही सलाह है कि इस समय हमें अपनी मानसिक तनाव से बाहर निकलना काफी ज्यादा जरूरी है नहीं तो यह तनाव हमारे लिए अंतहीन हो सकता है। इस समय में खुद को मानसिक रूप से मजबूत रखना बहुत ज्यादा जरूरी है और हमें बस यही ध्यान रखना चाहिए कि फिर से सब कुछ ठीक होगा हमें बस धैर्य के साथ इस महामारी का मुकाबला करना होगा।

मोबाइल की जगह परिवार वालों के साथ करें बातें

इस समय जब हमें घर में रहना जरूरी हो गया है तो इस समय हमें घर में रहकर ही छोटी छोटी खुशियां ढूंढनी होगी जिससे हम अपने मानसिक तनाव को दूर कर सकें। घर में रहकर ही हमें एक दूसरे से ज्यादा ज्यादा बातें करनी चाहिए और एक दूसरे का ख्याल भी रखना चाहिए। मानसिक तनाव को दूर करने के लिए हमें मोबाइल फोन का ज्यादा उपयोग करने की बजाय लोगों के साथ समय व्यतीत करना चाहिए।

दिनचर्या पर रखें विशेष ख्याल

इस संकटकाल में हमें अपनी दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना चाहिए। जहां तक हो सके पुराने दिनचर्या को बनाए रखें और समय पर सोना,जागना और खाना-पीना जरूरी है, सुबह उठकर व्यायाम करना भी काफी ज्यादा आवश्यक है जो कि हमारे मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने में सहायता करता है।

Disclaimer : This article is accurate and true to the best of the author’s knowledge. Content is for informational or education purposes only and does not substitute for personal counsel or professional advice in business, financial, legal, or technical matters

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