हिंदी व्याकरण

हिंदी व्याकरण हिंदी भाषा को शुद्ध रूप में लिखने तथा बोलने के नियमों का संकलन है। हिंदी भाषा को समझने के लिए हिंदी व्याकरण का ज्ञान महत्वपूर्ण है। भाषा मुख से उच्चारित होने वाले शब्दों और वाक्यों आदि का वह समूह है जिनके द्वारा मानव अपने मन की बात बता सकता है।
यहाँ हिंदी पराग में आप सभी के लिए हिंदी व्याकरण के सम्पूर्ण विषय को एकत्रित करके प्रस्तुत कर रहे हैं !

‘व्याकरण’: अर्थ और परिभाषा

‘व्याकरण’ शब्द की व्युत्पत्ति ‘वि + आ + करण’ से होती है। ‘व्याकरण’ शब्द का अर्थ “व्याक्रियन्ते शब्दा अनेन’ अर्थात् जिसके द्वारा शब्दों की व्युत्पत्ति का ज्ञान (पदार्थ ज्ञान) प्राप्त किया जाए। भाषा के वर्ण, शब्द और अर्थ ही प्रधान माने गये हैं। इन्हीं तीनों का व्याकरण में विवेचन होता है। व्याकरण का आश्रय भाषा है और भाषा के अंग वाक्य, शब्द और वर्ण हैं। इस कारण हिन्दी-भाषा के व्याकरण में भी इन विभागों पर विचार होना उचित है परन्तु विशेष सम्बन्ध गद्य- भाग से ही रहता है। पद्य भाग का सम्बन्ध छन्दशास्त्र से है, जिसका विस्तृत विवरण व्याकरण का विषय नहीं है, फिर भी उसका आरम्भिक ज्ञान ज़रूरी है। वास्तव में, व्याकरण वह विद्या है, जिसके द्वारा किसी भी भाषा को शुद्ध-शुद्ध बोलना, लिखना तथा पढ़ना समझ में आ जाए। व्याकरण को किसी भाषा के लिखित और वाचिक रूपों का यथार्थतः समझाने और ज्ञान कराने वाला शास्त्र कहा गया है।

आचार्यों ने हिन्दी व्याकरण के निम्नलिखित विभाग किये है :-

१-वर्ण-विचार – वर्ण-विचार व्याकरण का वह विभाग है, जिसमें वर्गों के भेद, आकार, उच्चारण तथा उनके मेल से शब्द-निर्माण के नियम दिये जाते हैं।

२- शब्द-विचार – शब्द-विचार वर्ण-ज्ञान के बाद का विभाग है, जिसमें शब्दों के भेद, अवस्था, रूपान्तर, संरचना तथा व्युत्पत्ति का वर्णन रहता है।

३- वाक्य-विचार – वाक्य-विचार वह विभाग है, जिसमें शब्दों से वाक्य बनाने के नियम दिये जाते हैं और वाक्यों के अवयवों का पारस्परिक सम्बन्ध बताया जाता है। विराम-भेद को, जिसका उद्देश्य लेख के भाव का हृदयंगम करना है, वाक्य-विचार के ही अन्तर्गत रखना तर्क-संगत है क्योंकि वाक्य के भाव के साथ उसका महत्त्वपूर्ण सम्बन्ध रहता है।

४-छन्द-विचार – छन्द-विचार से छन्द के नियमादि का ज्ञान होता है किन्तु इसका सम्बन्ध केवल पद्य से है।

आइए,अब हिंदी व्याकरण के सभी महत्वपूर्ण विषयों को उदाहरण सहित समझने का प्रयास करते हैं।