विज्ञान के चमत्कार | Essay on Wonders of Science in Hindi

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आज विश्व का कोना-कोना विज्ञानमय है । एक शताब्दी पूर्व किसने अनुमान लगाया होगा कि मानव जल, थल और नभ  के वक्षस्थल पर अपना एकाधिकार स्थापित कर लेगा? कौन कह सकता था कि मानव हिमालय के उत्तुंग शिखर पर झंडा फहरायेगा, वह सागर को अपने यानों से रौंद डालेगा और उन पर बैठकर आकाश की सैर करेगा । किसी ने यह न सोचा था कि मानव शक्ति इतनी प्रचण्ड होगी कि अपने देश में बैठे-बैठे मनुष्य दूसरे देश को विध्वंस कर देगा । आज विज्ञान के चरण इतने तीव्र है कि अब वे धरती पर ठहरने के लिए तैयार नहीं है । अब मानव युगों-युगों से कौतूहल भरने वाले चन्द्रमा को भी स्पर्श कर आया है। इतना ही नहीं चन्द्रमा के वक्षस्थल पर मानव निर्मित एक टैक्सी घूम रही है ।

मानव का चन्द्रमा पर जाना विश्व इतिहास में मानव की प्रकृति पर विजय की एक अभूतपूर्व घटना है।आज मानव-समाज का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जहाँ विज्ञान व्याप्त न हो । हमारे, घर के कुकर और गैस चूल्हे से लेकर युद्ध की विनाशकारी घटना तक विज्ञान, विज्ञान और विज्ञान ही है ।भोजन, कपड़ा, आवास,शिक्षा, चिकित्सा, मनोरंजन, यात्रा, समाचार और जीवन की प्रत्येक सम्भव क्रिया में आज विज्ञान सहायक है ।आशय यह है कि जीवन और मृत्यु स्वयं तथा इसके बीच की असंख्य अवस्थायें आज विज्ञान की चेरी हैं।विज्ञान आज सर्वव्यापी देव है जिसके अभाव में जीवन की कल्पना करना आज न केवल कठिन है वरन् असम्भव भी है।

विज्ञान के कारण आज देशीय दूरी समाप्त है हम सब आज एक कुटुम्ब बन गये हैं । हम जब चाहें विश्व के किसी कोने में जा सकते हैं । हम अपने घर में बैठे लन्दन में रहने वाले मित्र की बात सुन सकते है और उसे तत्काल

देख सकते हैं । ट्रेन,वायुयान  जहाज, रेडियो, टेलीविजन आदि आविष्कार ऐसे ही हैं।

अब  ऐतिहासिक घटनाएं ऐतिहासिक बातेऔर पुरुष भूतकाल की वस्तुएँ नहीं रह गयी है । विज्ञान ने भूतकाल की दूरी पूर्ण रुप से समाप्त कर दी है। अब हम जब चाहे गाँधी जी को देख सकते हैं और उनके भाषण को आज भी सुन सकते हैं । अब भूत सदैव भविष्य के लिये पूर्ण सुरक्षित है । प्रकृति और काल पर यह

अच-विजय विज्ञान की महान उपलब्धि है ।फोटोग्राफी, टेपरिकार्डिंग, वेतार का तार ,टेलीविजन आदि ऐसे ही चमत्कार है।

विज्ञान ने शिक्षा के क्षेत्र में अद्भुत सुविधा प्रदान की है। प्राचीन काल में पुस्तकों को सुरक्षित रखने की एक समस्या थी । पुस्तके पत्तो पर लिखी जाती थी और वे दीमक आदि कीड़ों से अधिक दिन बचाई नहीं जा सकती थी । परन्तु आज एक ओर कागज के आविष्कार से और दूसरी ओर छापे की मशीनों से एक पुस्तक की लाखो प्रतियों तैयार करके देश विदेश में भेजी जाती है । इस प्रकार विज्ञान की सहायता से हम पूर्वजों का ज्ञान सुरक्षित रखते है और साथ ही उसे फैला सकते हैं । गर्म  देशों में और विशेष रूप से विषुवत्

रेखा के आस-पास सभ्यता का विकास न हो सकने का कारण यह भी रहा है कि वहाँ पुस्तके सुरक्षित नही रखी जा सकी । विज्ञान  द्वारा दैनिक जीवन कितना प्रभावित हुआ है । इसकी कल्पना  घर की घड़ी, पंखे, रेडियो,आइरन (प्रेस ) कुकर, गैस चूल्हा  आदि को देख कर की जा सकती है । इस प्रकार साइकिल, स्कूटर, कार,माइक्रोफोन  टेलीफोनमोबइल  आदि ने मानव के श्रम  और समय को बचाने की जो व्यवस्था की है वह अत्यन्तलापदायक है । आज विद्युत और उसके सहयोग से चलने वाली मशीनों ने मानव को इतनी सुविधा प्रदान की है कि जिसकी कल्पना सम्भवतः हमारे पूर्वजों ने नहीं की थी । बिजली के प्रकाश से शहरों में नित्य दीवाली बनी रहती है । वैसे  भी वस्तु को सड़ने से बचाने के लिए रेफ्रीजरेटर, ताप नापने के लिए थर्मामीटर, भाषण  प्रसारित करने के लिए रेडियो और लगभग सभी उपयोगी वस्तुओं को बनाने के लिए मशीनें तैयार को जाती है । आटा चक्कियों , रस निकालने की मशीने, पानी से विद्युत बनाने की मशीनें आदि सभी विद्युत के कारण संभव  है । कहने का आशय यह है कि आज विश्व विद्युत की कृपा से सचमुच एक हो गया है।

किसी एक स्थान पर कुछ भी घटित हुई बात उसी क्षण सारा विश्व टेलीविजन से देख लेता है । क्या विश्व कभी  इस रूप में एकता के सूत्र में बंध सका है? विज्ञान के चमत्कारों में बड़े-बड़े जोड़ लगाने की मशीनों का आविष्कार भी अनोखा है । आज बहुत कुछ  वह काम जो मानव  शारीर करता था मशीने तो करती ही है वरन् वह भी कार्य जो मनुष्य का दिमाग करता था आज मशीने (रुप्यूटर) कर रही है ।विज्ञान वेत्ताओं का कथन है कि वह दिन दूर नहीं है जब सोचने वाली मशीन भी निर्मित हो जायेगी । इस प्रकार विज्ञान एक दूसरा मानव निर्मित कर देगा और सब उस दिन विज्ञान ईश्वर बन जायेगा । शरीर को स्वस्थ रखने में विज्ञान ने अभूतपूर्व सफलता प्राप्त को है । अनेक रोगों का उपचार तो उपलब्ध है ही. आज तो शरीर के किसी अंग (फेफड़ा आदि) को निकाल कर दूसरा यही अंग लगा देने की कला प्राप्त है । अब बहरे सुन सकते हैं और अंधे पढ़  सकते हैं मानव की किसी कभी या आवश्यकता के लिए आज विज्ञान के पास समाधान है |

मनोरंजन के साधन भी विज्ञान ने जुटाये है । सिनेमा और टेलीविजन ऐसे साधनों में प्रमुख हैं। सिनेमा मानव द्वारा निर्मित एक दूसरा जगत है । इसमें नदी, पहाड़, महल, कीड़े, पक्षी, पशु, मानव, आदि चित्रों  द्वारा दिखाये जाते हैं । लेकिन ये चित्र जीवित होते हैं । कलरव करते हुए पक्षी. रेंगते हुए सॉप, युद्ध करती हुई सेना हँसते  हुए मनुष्य और स्त्रियों ,बहते हुए झरने, गरजते हुए बादल, वायुयानों की उड़ानें, घोड़ों के टापों की आवाजें आदि सभी देखने सुनने को मिलते हैं । फिर भी ये सभी स्थिर या चलचित्र हैं ।

कैसा  विलक्षण है विज्ञान का यह चमत्कार? अब विज्ञान के चरण प्रकृति विजय के दूसरे सोपान पर हैं । जल थल की समस्त मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति करने के पश्चात् अब वह आकाश में स्थित अभी तक बने हुए रहस्य ग्रहों आदि पर विजय प्राप्त करने के लिए कृत संकल्प है । अब तक कई बार लाखों मील ऊपर जा कर ‘स्पुतनिक (सैटेलाइट) पृथ्वी की परिक्रमा कई बार कर चुके हैं । चन्द्रमा पर मानव हो आया है और एक टैक्सी घूम रही है जो वहाँ की विभिन्न सूचनायें भेज रही है। ऐसा लगता है कि विज्ञान के लिए कुछ भी असम्भव नहीं है ।

सचमुच विज्ञान की विजय-यात्रा मानव इतिहास की महान उपलब्धि है। परन्तु विज्ञान का एक अनिष्ट  पक्ष भी है। लाखों प्रकार की मशीनों के बन जाने के कारण आज मानव-श्रम  की उपयोगिता नष्ट  हो गयी है ।मानव का मूल्य  कीड़ों  मकोड़ों की तरह हो गया है । यही कारण है कि आज  मनुष्य बेकारी का शिकार है । लाखों मनुष्य भूखो मरते है । कुटीर उद्योगो पर पलने वाला गरीब व्यक्ति आज असहाय है । ज़हरीली गैस और विध्वंसक आयुधों  के परिणाम स्वरूप मनुष्य भयाक्रान्त रहता है। एटम बम और हालोजन बम के विध्वंसक  परिणामों को जापान का नगर हिरोशिमा और नागासाकी आज भी मानव विनाश की करुण कहानी कह रहा है। आज हमें विज्ञान ने सर्वनाश के कगार पर खड़ा कर दिया है | विषैली गैसो और वैज्ञानिक दवाइयों तथा बमों के सागरों में परीक्षण से अनेक प्रकार के नये रोगों को जन्म मिला है जिनका कोई इलाज नहीं है।

विज्ञान ने ही आज की सभ्यता को पूंजीवाद और साम्यवाद नामक दो वर्गों में बांट दिया है । अमीर अधिकाधिक अमीर बनता चला जा रहा है और गरीब निरन्तर गरीब । फलतः गरीब और अमीर एक दूसरे के रक्त के प्यासे बन बैठे है । अस्तु  भूतकाल की अपेक्षा आज चोरी, डाका, कत्ल , अनाचार, घृणा आदि अधिक बढ़  गये है। आज का धर्म हिंसा बन गया है । विज्ञान का सबसे बड़ा कुफल यह हुआ है कि आज मनुष्य का चारित्रिक पतन हो गया है । यह विलासी है, भोगी है ।शरीर श्रम उससे होता नहीं है ।खाने पीने में असंयम है । रेडियो, टेलीविजन सिनेमा, फैशन आदि ने उसे इतना दबोच लिया है कि वह अपने स्वतन्त्र विचार खो बैठा है आत्मा परमात्मा के विचार आज अंधविश्वास माने जाते हैं और कंचन  कामिनी  और सुरा का दास मनुष्य आज तन से जर्जर और पुरुषत्व से हीन बन गया है।

विज्ञान ने सरल जीवन को इतना जटिल और यान्त्रिक बना दिया है कि आज वह अपने ही बुने हुए जाल में फंस गया है। फिर भी विज्ञान द्वारा जुटाये हुए साधन और सुख इतने विपुल हैं और उसकी उपलब्धियाँ इतनी आश्चर्यजनक है कि विरला ही उनसे आकर्षित न होगा । विज्ञान के चमत्कारों से मानव का स्वाभिमान बढ़ा है । विश्व अब एक परिवार सा है । फिर भी भौगोलिक दूरियों के कम होने के साथ-साथ मानव हृदय की दूरियां  बहुत बढ़ गयी हैं । मानव आज देव की ओर उन्मुख न होकर दानव की ओर उन्मुख है । विज्ञान एक दृष्टि से अभिशाप है लेकिन दूसरी दृष्टि से वरदान भी है । विज्ञान मानव के लिये वरदान बन सके इसके लिये हम मनुष्यों को, विज्ञान को मानवीय मूल्यों के अनुकूल नियन्त्रित करता होगा अन्यथा मानव के हाथ लगा हुआ यह वरदान ऐसा ही सिद्ध होगा जैसा बन्दर के हाथ में रेजर । हम आशा करें कि मानव अपनी बुद्धि के संयम को न खोये।

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