Makar Sankranti

मकर संक्रांति | Essay on Makar Sankranti in Hindi

हिंदी, हिंदी निबंध

भारत त्योहारों का देश है ।वर्ष भर त्योहार आते रहते है ।भारतीय संस्कृति त्योहारों से मानव जीवन मे उमंग, उत्साह, खुशी,लाते है| भारत मे सामान्यतौर पर चार ऋतुयें मानी जाती है और वर्षा से शीत ऋतु तक अनेको त्योहार मनाये जाते है ।जब एक ऋतु जाती है और दूसरी ऋतु आती है तो इस मिलन को संक्रान्ति कहते है । जब शीत ऋतु की बिदाई तथा ग्रीष्म ऋतु का आगमन होता है इस मिलन को “मकर”संक्रांति कहते है । ज्योतिष के अनुसार सूर्य का शनि की राशि मे मिलन होता है ।इस दिन से  शीत की तेजी में कुछ कमी आने का संकेत लेकर आती है मकर संक्रांति। अब तक जो गरिष्ठ भोजन खाकर, आराम से पचाते रहे हैं, उसमें बदलाव का भी इशारा खिचड़ी के सेवन के रूप में दिखता है। सूर्य उत्तरायण होते हैं, इसके भी मायने पर्व परम्परा में निहित हैं।

सूर्य अन्नदाता हैं

सूर्य को स्वास्थ्य एवं धनप्रदाता के साथ अन्नदाता भी कहा गया है। सारे खाद्यान्न की उपज में इसका तेज समाया है। अन्न में जो ओज है, जो शक्ति है, जान है, वो सूर्य की ऊष्मा के कारण ही है। सूर्य विश्वात्म देवता हैं जो प्रत्यक्ष है,ज्योतिर्मय है। समस्त धर्म इनकी किसी न किसी रूप में आराधना करते हैं। खास अवसरों पर इनकी नियमित पूजा का विधान है।

 ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को सात घोड़ों पर सवार प्रातः काल रोजगार बढ़ाने वाले, दोपहर में भोजन देने वाले और सायंकाल के बाद विश्राम देने वाले कहा गया है। सनातन संस्कृति में सूर्य की आराधना की जाती है। वारों में रविवार, तिथियों में भानु सप्तमी और सूर्य षष्ठी वर्ष में मकर संक्रांति पर विशेष पूजन और दान किया जाता है। मकर संक्रांति पर सूर्य की आराधना से पांडु रोग (पीलिया)का विनाश, कांति, आयु बल में वृद्धि, नेत्र रोग और चर्म रोग में लाभ मिलता है, साथ ही इस तिथि पर दान करने से सब तरह के लाभों की प्राप्ति होती है।

पर्व का खगोलीय महत्व

सामान्यतः सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करते हैं, किंतु कर्क और मकर राशि में सूर्य का प्रवेश धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होता है। सूर्य का यह संक्रमण छह-छह माह में होता है, इसेउत्तरायण और दक्षिणायन कहते हैं। भारत देश उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है। मकर संक्रांति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध पर होता है अर्थात् भारत

से दूर, इसी कारण यहां रातें बड़ी और दिन छोटे होते हैं तथा सर्दी का मौसम रहता है। किंतु मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरार्ध में आते हैं और रातें छोटी व दिन बड़े होने लगते हैं। गर्मी का मौसम प्रारम्भ हो जाता है।

मकर संक्रांति से सूर्य की यात्रा अंधकार से प्रकाश की ओर प्रारंभ हो जाती है। प्रकाश अधिक होने से प्राणियों में चेतना बलवती होती है, इसीलिए त्राटक, शक्ति पूजा और कुंडलिनी जागरण की दीक्षा और सूर्य पूजन और दान का विशेष महत्व है।

पुण्य लाभ की विधि-

सूर्य के उत्तरायण होने के पर्व का आरम्भ सूर्योदय से पूर्व किए जाने का विधान है। पर्व परम्परा के निर्देश इस प्रकार हैं- सूर्योदय से पूर्व तिल, बेसन और आटे से बना उबटन लगाकर स्नान करें। श्वेत या हल्के रंग के साफ़वस्त्र पहनें, कलश में जल, लाल चंदन, फूल, अक्षत डालकर भगवान सूर्य की ओर पूर्व दिशा में मुंह करें और ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ उच्चारते हुए सूर्य को अर्घ्य दें। तत्पश्चात तिल-गुड़ के लड्डू, खिचड़ी की सामग्री और संक्रांति निमित्त उपयोगी वस्तुओं का दान करें, घर के बुजुर्गों का आशीर्वाद लें। पहले खिचड़ी का सेवन करें, फिर गुड़, तिल और अन्य भोजन ग्रहण करें। मकर संक्रांति के दिन अधिक से अधिक धूप में रहना अच्छा होता है, इसीलिए पतंग उड़ाने का महत्व भी है।

Makar Sankranti

पर्व के अन्य रुप-

मकर संक्रांति पर सूर्य का शनि की राशि में मिलन होने से संगम वाली नदियों में स्नान का विशेष महत्व होता है। इसीलिए गंगासागर, प्रयागराज में त्रिवेणी संगम और अन्य स्थानों पर जहां-जहां नदियों के संगम हैं वहां स्नान किया जाता है। उत्तर भारत में यह पर्व खिचड़े के रूप में मनाया जाता है साथ ही माघ मेला भी लगता है।महाराष्ट्र: में विवाहित स्त्रियां हल्दी-कुमकुम के रूप में इस त्योहार को मनाती हैं। गुड़ के साथ अन्य अनाज व एक उपहार एक-दूसरे को देती हैं।बंगाल :में तिल दान करने की प्रथा है। गंगासागर में विशेष मेला लगता है।

संक्रांति के दिन गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चल कर कपिल मुनि आश्रम से होती हुई सागर में गंगा सागर में विलीन हुई। मान्यता यह भी है कि कृष्ण को प्राप्त करने के लिए यशोदा जी ने इसी दिन मक्खन का दान किया था।

तमिलनाडु: में यह त्योहार पोंगल के रूप में चार दिन तक मनाया जाता है। इस दिन पहले कचरा इकट्ठा कर जलाया जाता है| फिर लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। असम :में माघ बीहू नाम से मनाते हैं।

राजस्थान: में सुहागन महिलाएं अपनी सास को बायना देकर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं और सौभाग्य सूचक 14 वस्तुओं का दान भी करती हैं।पंजाब: में एक दिन पूर्व यानी आज लोहड़ी को उमंग से मनाया जाता है। बिहार: में विशाल मेला लगता है। यहां मंदार पर्वत के नीचे सरोवर में स्नान किया जाता है। मधु कैटभ नामक राक्षसों का  वध यहीं पर हुआ था।

मकर संक्रांति से मनुष्य के जीवन,खानपान में अनेक बदलाव आते है जो स्वास्थ्य वर्धक होते है ।मकर संक्रांति से दिन-रात अपने कद की अदला-बदली करते हैं। सूर्य अब प्रखर होंगे। इस मेल के साक्षी है लोहड़ी और मकर संक्रांति व इस दिन मनाए जाने वाले अन्य राज्यों के पर्व। अब खान-पान भी बदलेगा और विचार भी। तो चलिए देखते हैं कि कैसा है पर्व सम्मत आहार जो पौष्टिक भी है, और स्वाद-भरा भी।

मिला-जुला प्रसाद-

लोहड़ी की रात यह प्रसाद अर्पित होता है और फिर भर-भर के इसे खाते हुए खूब खुशियां मनाई जाती हैं। इसमें शामिल होते हैं पॉपकॉर्न, मूंगफली,चावल के फुल्ले और गुड़-तिल की रेवड़ी। पौष्टिकता की दृष्टि से ये एक तरह से पूर्ण आहार हो जाता है क्योंकि मूंगफली, फुल्ले और पॉपकॉर्न के मिश्रण से प्रोटीन मिलता है,फुल्ले और तिल आयरन देते हैं, तिल से कैल्शियम, ओमेगा 3, जिंक आदि मिलते हैं। फुल्लों से विटामिन ए भी प्राप्त हो जाता है।मूंगफली और तिल फैट के भी अच्छे स्रोत हैं। मधुमेह के रोगी तिल की रेवड़ी की जगह प्रसाद में सादे तिल का सेवन कर सकते हैं।

गुड़ की रोटी-

इस पर्व पर गुड़ की रोटी, दही भल्ले, और लस्सी भी भोजन में शामिल किए जाते है। सभी प्रोटीन, कैल्सियम, विटामिन ए और ऊर्जा से भरपूर खाद्य है। विटामिन ए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में आवश्यक है, जो ठंड के मौसम के लिए जरूरी है, सो इसके बेहतरीन स्त्रोत मक्के की रोटी और सरसो के साग को इन दिनों खूब खाया जाता है।

खिचड़ी-

मकर संक्रांति पर्व पर खिचड़ी बनाई जाती है इसमें की तरह की सब्जियां ,दाल तथा चांवलके मिश्रण से आवश्यक  प्रोटीन मिलता है तथासब्जियों से सूक्ष्म पोषक तत्त, विटामिन वखनिज मिल जाते है। इस खिचड़ी को समपूर्णरुप से पौष्टिक बनाने के लिए वसा जरूरी है, सो वो धी के रूप में मिलाकर जोड़ ली जाती है।

गुड़-तिल के लड्डू-

मकर संक्रांति पर गुड़ खाने की परंपरा है। कही लड्डू आटे और तिल के बनते है । तो कहीं गुड़ में तिल और मूंगफली डालकर। कुल मिलाकर प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और विटामिन के अच्छे स्रोत बन जाते है।

मधुमेह के रोगियों के लिए इस पर्व परकुछ मीठा बनाना हो, तो मूंगफली और तिलका मीठा बना सकते हैं, जिसे बांधने के लिए अंजीर को भिगोकर-कूटकर इस्तेमाल करें। इस मीठे का बहुत सीमित मात्रा में ही उपयोग करें, केवल त्योहर पर मुंह मीठा करने जितना।

पतंग उड़ाने:

पर्व की हर परंपरा को उत्साह के साथ मनाया जाता है ,इस दिन पतंग उड़ाने का भी प्रचलन है ।

दान :

इस दिन दान में दाल,चावल,गाजर,आलू,अमरूद,नमक,घी और लड्डू दान देने का प्रचलन है ।

घर मे:

त्योहार का आनंद परिवार के साथ मिलकर मनाने में आता है ,सभी अपने अपने अनुभव एक दूसरे को सुनाते है , कभी कभी किसी किसी की परेशानियों का हल भी मिल जाता है । मकर संक्रांति ऐसा ही सुहावना पर्व है ।

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