25 हिंदी पहेलियां

हिंदी

पहेलियों बच्चों की सोचने की क्षमता और रचनात्मकता को बेहतर बनाने में मदद करता है। पहेलियां मजेदार हैं और सीखने का अवसर भी प्रदान करती हैं। यह आवश्यक है कि युवा दिमाग को सोचने और विकसित होने के पर्याप्त अवसर मिलें। जब वे सोचना शुरू करते हैं, तो वे तर्क करना शुरू कर देंगे और ये प्रतिभाओं को जन्म देते है। इसी उद्देश्य से यहाँ कुछ अच्छी हिंदी पहेलियाँ ले कर आये हैं।

1- पैर न हो तो नग बन जाए, सिर न हो तो ‘गर’ |
   यदि कमर कट जाए मेरी, बन जाता हूं ‘नर।’ ||
2- मैं सबके हूँ पास , मुझे खो कर नहीं होता कोई उदास |
3- अन्त कटे तो कौआ बन जाए, प्रथक कटे तो दूरी का माप |
   मध्य कटे तो बटन का साथी, वो अक्षर तीन बता दें आप ||
4- भाई मेरा बड़ा शैतान, बैठे नाक पर और पकड़े कान ?
5- दो अक्षर का नाम मेरा, आता हूँ खाने के काम।
   उल्टा लिखकर नाच दिखाऊं, फिर क्यों में अपना नाम छिपाऊं?
6- मुंह पर रख के अपना हाथ, बोला करती वो दिन रात |
   जब हो जाती बन्द जुबान, लोग घुमाते उसके कान ||
7- एक थाल मोतियों से भरा, सबके सिर पर उल्टा धरा |
   चारों ओर वो थाल फिरे, मोती फिर भी एक न गिरे ||
8- न किसी से झगडा,न किसी से लड़ाई |
   फिर भी बेचारी की होती रोज पिटाई ||
9- एक छोटा जीव बताओ, अचरज करे कमाल ।
   खुद से तिगुना वजन उठाये, चलता धीमी चाल ।।
10- आदि कटे तो पानी बन जाता, बीच कटे तो बन जाता काल|
    बुरी नज़र से तुम्हे बचता,यदि जो लगे तुम्हारे गाल||
11- गर्मी मे खलती है और सर्दी मे मन को भाती|
    उससे ही दिन रोशन होता,बोलो क्या वो कहलाती ||
12- तीन अक्षर का मेरा नाम, पहला हटे तो राम राम |
    दूजा हटे तो फल का नाम,तीजा हटे तो काटने का काम ||
13- जब तक रहती मैं सीधी, खूब पानी पिलाऊंगी |
    अगर मुझे तुम कर दो उल्टा, मैं गरीब हो जाऊंगी ||
14- धूप देखकर मैं आ जाऊं, छांव देखकर शर्मा जाऊं |
    जब आए हवा का झोंका, साथ उसी के उड़ जाऊं ||
15- एक राजा की अनूठी रानी, दुम के सहारे पीती पानी |
16- काली हूँ पर कोयल नहीं, लंबी हूं पर डंडी नहीं |
    डोर नहीं पर बांधी जाती, मैया मेरा नाम बताती ||
17- बोझा ढोता जो दिन भर, करता नहीं पुकार |
    मालिक होते हैं जिसके धोबी और कुम्हार ||
18- पानी में रहता हरदम खुश, धीमी है जिसकी चाल |
    खतरा भांपकर सिमट जाए बन जाता खुद की ढाल ||
19- ऊंट जैसी बैठक जिसकी, हिरन की चाल |
    अजीब है वह जानवर,जिसकी न दुम है न बाल ||
20- आपस की उलझन सुलझा कर,अलग-अलग जो बांटता |
    दांत जिसके तीखे पर वो हमें नहीं वह काटता ||
21- एक फूल है और एक फल है भाई |
    दोनों मिलकर बनाये एक मिठाई ||
22- पाँच अक्षर का मेरा नाम, उल्टा सीधा एक समान |
    भारत की एक भाषा हूँ मैं, कोई तो बताओ मेरा नाम ||
23- एक पैर की काली धोती, जाड़े में हरदम वो सोती |
    गरमी में छाया देती वो ,पर सावन में वह हरदम रोती ||
24- हाथी, घोड़ा, ऊंट, नहीं वो जो खाए दाना या घास |
    सदा हवा पर जिन्दा रहे, ले न पल भर सांस ||
25- दुनिया भर की करता मैं सैर, धरती पर कभी न रखता पैर |
    दिन में सोता रात में जागता , होती रात अँधेरी, मेरे बगैर ||

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