हिंदी कहावतें/मुहावरे

हिंदी

एक भाषा की समृद्धि और अभिव्यक्ति की क्षमता में कहावतों और मुहावरों का प्रयोग उपयोगी होता है। वैसे मुहावरा शब्द एक अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है आदी होना या अभ्यास होना। मुहावरा छोटा होता है परन्तु यह एक बड़े विचार को व्यक्त करता है। हिंदी के कुछ मुहावरे और उनके प्रयोग यहाँ दिए गए हैं और आगे भी हम इसमें जोड़ते जायेंगे –

1. जैसी करनी वैसी भरनी |

अर्थ एवं प्रयोग : कर्म के अनुसार ही फल मिलता है।

बुरा काम करोगे तो बुरा होगा , अच्छा काम करोगे तो अच्छा होगा तभी तो कहा भी गया है जैसी करनी वैसी भरनी |

2. देर आए दुरुस्त आए।

अर्थ एवं प्रयोग : किसी काम में ज्यादा समय लगना पर काम अच्छा होना ।

राज ने धीरे-धीरे बहुत कोशिश करके अच्छा पियानो बजाना सीख लिया, इस पर सभी ने कहा चलो देर आए दुरुस्त आए।

3. जहाँ चाह वहाँ राह।

अर्थ एवं प्रयोग : किसी काम को करने की प्रबल इच्छा हो तो उस काम को करने का तरीका भी मिल जाता है |

सुविधा न होते हुए भी बहुत से भारतीय खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में सफल हुए हैं क्योंकि उन्होंने मन में

ठान लिया था इसलिए कहते हैं जहाँ चाह वहाँ राह |

4. जैसा देश वैसा भेष।

अर्थ एवं प्रयोग : परिस्थिति के अनुसार ढल जाना।

जैसा देश वैसा भेष की नीति से ज़िंदगी आसान और बेहतर हो जाती है।

5. दाल में काला |

अर्थ एवं प्रयोग :कुछ संदेह होना।

रवि, वह बहुत घबराया हुआ था, उसे देखकर माँ ने सोचा कि पक्का कुछ तो दाल में काला है।

6. जिसकी लाठी उसकी भैंस |

अर्थ एवं प्रयोग : जो शक्तिशाली हो उसी की बात माननी पड़ती है |

वह सत्ता में बहुत ऊंचे पद पर है इसलिए वह कुछ भी कर सकता है, सो जिसकी लाठी उसकी भैंस |

7. जो गरजते हैं वो बरसते नहीं |

अर्थ एवं प्रयोग : ज्यादा बोलने वाले कुछ ज्यादा करे ये जरूरी नही।

साहब कह रहे थे कल से सब बदल जाएगा ,उनके कहने से क्या होता है जो गरजते है वो बरसते नहीं।

8. लालच बुरी बला है |

अर्थ एवं प्रयोग : ज्यादा लालच करना बुरी बात है।

तुमने उसकी घड़ी क्यों चुराई, अब सजा तो मिलेगी मैंने पहले ही बोला था लालच बुरी बला है |

9. बोए पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय |

अर्थ एवं प्रयोग : जैसा काम करोगे वैसा फल मिलेगा |

तुमने कम पढ़ाई की, नंबर तो कम आयेगे ही बोए पेड बबूल के तो आम कहां से होय।

10. चोर – चोर मौसेरे भाई / एक ही थैली के चट्टे-बट्टे |

अर्थ एवं प्रयोग : एक जैसी सोच रखने वाले लोग।

उनसे बात मत करो कोई हल नहीं निकलेगा ,वो एक ही थैली के चट्टे बट्टे है।

11. आगे कुआँ पीछे खाई |

अर्थ एवं प्रयोग : हर तरफ से मुसीबत में होना।

राजू के पास बैंक की किस्त भरने के पैसे नहीं और किस्त न भरने पर बैंक वाले उसकी गाड़ी ले जाएंगे जो की उसकी कमाई का

एक साधन है उसके लिए तो आगे कुआँ पीछे खाई वाली परिस्थिति है |

12. शैतान का नाम लिया और शैतान हाज़िर |

अर्थ एवं प्रयोग : जिसके बारे में सोचो या बोलो उसका सामने आ जाना |

हम तुम्हारी ही बात कर रहे थे और तुम आ गए ये तो ऐसे हो गया कि शैतान का नाम लिया और शैतान हाज़िर |

13. नाच न जाने आंगन टेढ़ा |

अर्थ एवं प्रयोग : अपनी कमी छुपाने के लिए दोष अन्य चीजों पर देना |

दिनेश को क्रिकेट आता नहीं लेकिन दूसरे खिलाड़ियों को बहाने बना रहा है न खेल पाने के, उसका तो ऐसा हाल है

जैसे नाच नाजाने आंगन टेढ़ा।

14. हर चमकने वाली चीज सोना नहीं होती |

अर्थ एवं प्रयोग : बाहरी रंग -रूप से प्रभावित नहीं होना चाहिए |

जब उसका बिना मेकअप वाला मुंह देखा तो पता चला है हर चमकने वाली चीज सोना नहीं होती।

15. जल में रहकर मगर से बैर ठीक नहीं |

अर्थ एवं प्रयोग : अपने क्षेत्र के ताकतवर व्यक्ति से दुश्मनी नहीं करनी चाहिए।

वो तुम्हारा बाॅस है , उससे बहस करना मतलब जल में रहकर मगरमच्छ से बैर।

16. जैसा राजा वैसी प्रजा |

अर्थ एवं प्रयोग : जैसा नेत्रित्व होगा वैसे ही अनुयायी होंगे |

उनके घर के बच्चे क्या करे जैसा राजा वैसी प्रजा।

17. डूबते को तिनके का सहारा |

अर्थ एवं प्रयोग : मुसीबत से बाहर निकलने की वजह।

कभी कभी तुम्हारा विचार मेरे लिए डूबते को तिनके का सहारा हो जाता है।

18.नेकी कर दरिया में डाल |

अर्थ एवं प्रयोग : भलाई करने के बदले में कुछ अपेक्षा न रखना ।

तुमने उसकी सहायता की अच्छी बात है पर अब नेकी कर दरिया में डालो, अपने को ज्यादा महान ना समझो।

19. लोहा लोहे को काटता है |

अर्थ एवं प्रयोग : ताकतवर को ताकतवर ही हरा सकता है।

अगर तुम्हे उससे जीतना है तो बहुत ताकतवर बनना पड़ेगा क्यों कि लोहा ही लोहे को काटता है।

20. मुख में राम बगल में छूरी

अर्थ एवं प्रयोग : ऊपर से अच्छी बातें करना और अन्दर से बुरे विचार रखना |

वह तुम्हारी सहायता जरूर कर रहा है पर उसका स्वभाव मुख मै राम बगल में छुरी जैसा है।

21. सांच को आंच क्या |

अर्थ एवं प्रयोग : जो सच्चा होता है उसे किसी बात का डर नहीं होता है |

अगर तुम सही हो तो केस जीत जाओगे सांच को आंच क्या।

22. जैसी करनी वैसी भरनी |

अर्थ एवं प्रयोग : जो जैसा करता है उसके साथ वैसा ही होता है |

तुमने झूठ बोला था, तो कर बुरा तो होय बुरा तो होना ही था।

23. आप भले तो जग भला |

अर्थ एवं प्रयोग : जो खुद अच्छा है उसके लिए सब अच्छा है।

तुमने अच्छा किया इसलिए अब तुम्हारा काम आसान हो गया इसलिए आप भला तो जग भला।

24. ऊंची दूकान फीके पकवान / नाम बड़े और दर्शन छोटे |

अर्थ एवं प्रयोग : देखने में अच्छा पर असलियत में सामान्य होना।

मुझे पता था वो मदद नही करेगा उसका तो नाम बड़े और दर्शन छोटे वाला हाल है।

25. ऊँट के मुंह में जीरा |

अर्थ एवं प्रयोग : जरूरत से बहुत कम होना।

उसने मुझे इतनी सहायता की , ऐसा अहसास हो रहा है जैसे ऊंट के मुंह में जीरा।

26. चार दिन की चांदनी फिर अँधेरी रात |

अर्थ एवं प्रयोग : थोड़े समय की खुशी या आराम।

शादी में आकर बहुत अच्छा ऐहसास हो रहा है पर सब चार दिन की चांदनी और फिर अंधेरी रात जैसा है।

27. भेड़ की खाल में भेड़िया |

अर्थ एवं प्रयोग : ऊपर से कुछ अंदर से कुछ।

उसकी बात मत मानना वह तो भेड़ की खाल में भेडिया है। तुम्हे गलत रास्ते पर डाल देगा।

28. अंत भला तो सब भला |

अर्थ एवं प्रयोग : आखिर में क्या होता है वही मायने रखता है।

बहुत मुश्किल के बाद यह काम हो गया, चलो अंत भला तो सब भला।

29. दूर के ढोल सुहावने लगते हैं |

अर्थ एवं प्रयोग : दूर से चीजें और दूसरों की चीज अधिक महत्त्व की लगती है |

तुम्हारा कुर्ता ही ज्यादा अच्छा है वो तो दूर के ढोल सुहावने लगते ही है, इसलिए तुमको दूसरी दुकान वाला कुर्ता ज्यादा अच्छा लगा।

30. भैंस के आगे बीन बजाना / मूर्ख के आगे रोए अपने नैन खोए |

अर्थ एवं प्रयोग : किसी मूर्ख को अपनी बात समझाना |

वह मानसिक रूप से बीमार है, उसको ज्यादा समझा के क्यों भैस के आगे बीन बजाने वाला काम कर रहे हो

31. एक हाथ से ताली नहीं बजती ।

अर्थ एवं प्रयोग : झगड़े के लिए दो लोगों की जरूरत होती है।

तुम कितना भी बोलो एक हाथ से ताली नहीं बजती।

32. दुम दिखाकर भाग जाना |

अर्थ एवं प्रयोग : डर के भाग जाना |

सिपाही ने जैसे ही डंडा दिखाया वह दुम दिखाकर भाग गया।

33. घर का भेदी लंका ढाहे |

अर्थ एवं प्रयोग : खास व्यक्ति दुश्मन के साथ मिल कर अधिक नुक्सान पहुंचा सकता है |

तुमने राम को चोट पहुचाई अब वह दूसरे गुट मै जाकर घर का भेदी लंका ढाहे वाला काम करेगा।

34. जैसा देश वैसा भेष |

अर्थ एवं प्रयोग : जगह के अनुसार रहना चाहिए |

देखो उसने भारत में यहां के जैसा कुर्ता पहना है जैसा देश वैसा भेष कितना अच्छा लगता है।

35. अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत |

अर्थ एवं प्रयोग : समय पर काम नहीं करने से पछताना ही पड़ता है।

अब रोने से क्या फायदा , अच्छे से पढ़ाई करते तो अब पछताए होत क्या चिडिय़ा चुग गई खेत वाला हाल नही होता।

36. जैसे को तैसा |

अर्थ एवं प्रयोग : अच्छे के साथ अच्छा और बुरे के साथ बुरा करना |

अगर वो तुम्हे सहयता करे तो तुम भी उसकी सहायता कर देना जैसे के साथ तैसा ही ठीक रहता है।

37. दान की बछिया के दांत नहीं देखे जाते।

अर्थ एवं प्रयोग : दान में मिली चीजों का दाम नहीं आंकना चाहिए।

ये आम की पेटी तुम्हे उपहार में मिली है तो ज्यादा मत सोचो ,दान की बछिया के दांत नहीं देखे जाते।

38. दूध का जला छाछ को भी फूंक – फूंक कर पीता है |

अर्थ एवं प्रयोग : गलती करके सावधान हो जाना चाहिए।

पहले उसे बहुत चोट लग गई थी सीढ़ियां चढ़ते वक्त इसलिए आराम से चलता है हमेशा, इसे कहते है दूध का जला छाछ भी फूक कर पीता है।

39. अन्धो में काने राजा |

कम ज्ञानवान लोगों में अधिक ज्ञानवान होना |

वह छोटी जगह है इसलिए थोड़ी इंग्लिश आने पर भी वह इंग्लिश का टीचर बन गया, इसे कहते हैं अंधों में काना राजा।

40. नीम हकीम ख़तरा-ए-जान|

अर्थ एवं प्रयोग : चीजों का कम ज्ञान होना खतरनाक हो सकता है |

उसने सिर्फ फार्मेसी अध्यन किया है, हर बिमारी के लिये उसके पास जाना ठीक नहीं।नही तो नीम हकीम ख़तरा ए जान जैसा

हाल हो जाएगा।

41. उल्टा चोर कोतवाल को डांटे|

अर्थ एवं प्रयोग : खुद की गलती दूसरों पर डालना |

एक तो तुमने किताब खराब कर दी ऊपर से मुझे डांट रहे हो ये तो उल्टा चोर कोटवाल को डांटे वाली बात हो गई।

42. जैसा बोओगे वैसा काटोगे |

अर्थ एवं प्रयोग : कर्म के हिसाब से फल मिलता है |

नीम का पेड़ लगाया है तो नीम ही उगेगा ,आम आम करने से क्या होगा, जैसा बोओगे वैसा ही काटोगे।

43. थोथा चना बाजे घना / अधजल गगरी छलकत जाय |

अर्थ एवं प्रयोग : कम होने पर ज्यादा का दिखावा करना।

वह तरह-तरह के कुछ भी आंसर दे कर थोथा चना बाजे घना जैसा काम कर रहा था।

44. बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद |

अर्थ एवं प्रयोग : कोई चीज समझ ना आने पर उसकी बुराई करना।

उसने यह किताब पहली बार पड़ी ,कुछ समझ नहीं आया और बोला बहुत खराब किताब है ,अब बंदर क्या जाने अदरक का

स्वाद।

45. दूर के ढोल सुहावने |

अर्थ एवं प्रयोग : जो चीज हमारे पास नहीं होती है वही ज्यादा अच्छी लगती है |

तुमको तो उसका घर अच्छा लगेगा ही क्योंकि दूर के ढोल सुहावने लगते है।

46. घर की मुर्गी दाल बराबर।

अर्थ एवं प्रयोग: घर की चीजों या लोगो का महत्व ना लगना।

राधा कितना भी अच्छा खाना बना ले पर उसका बेटा कभी उसकी तारीफ नहीं करेगा क्योंकि घर की मुर्गी दाल बराबर होती है

सबके लिए।

47. जितनी चादर उतने ही पैर पसारो |

अर्थ एवं प्रयोग : आमदनी के हिसाब से ही खर्चा करना चाहिए।

जरूरी नहीं कि तुम अभी घर खरीदो जितनी चादर है उतने ही पैर पसारने चाहिए ,पहले दुकान का कर्जा चुका लो।

48. सौ सुनार की, एक लोहार की |

अर्थ एवं प्रयोग : समझदार लोग बहुत सोच समझकर बोलते और काम करते हैं।

उसने जो काम किया है वह सो सुनार की एक लुहार की जैसा है।

49. जान है तो जहान है |

अर्थ एवं प्रयोग : जब तक आप जिंदा है तब तक ही आप चीजों का मजा ले सकते हैं।

कोरोना फैला हुआ है ,घर पर रहना ही अच्छा है क्यो कि जान है तो जहान है।

50. जंगल में मोर नाचा किस ने देखा?

अर्थ एवं प्रयोग : प्रमाण बिना चीजों को महत्व नहीं मिलता |

जब तक सब के सामने तुम अपनी कला नही दिखाओगे जंगल में मोर नाचा किस ने देखा जैसा हाल रहेगा।

51. नौ सौ चूहे खाके बिल्ली हज को चली |

अर्थ एवं प्रयोग : अच्छे होने का दिखावा करना।

पहले रमेश ने लोगो को बहुत परेशान किया अब मदद करके नौ सो चूहे खाकर बिल्ली हज को चली वाला हाल है क्यो कि चुनाव

में खड़ा होने जा रहा है।

52. हाध कंगन को आरसी क्या |

अर्थ एवं प्रयोग: प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं पढ़ती।

सबको कहने दो की तुमने दसवीं नहीं की तुम्हारे पास मार्कशीट है ना ,फिर हाथ कंगन को आरसी क्या।

53. राई का पहाड़ मत बनाओ।

अर्थ एवं प्रयोग : छोटी छोटी बात का बड़ा बवाल बनाना।

माना तुमसे गलती हो गई ,अब राई का पहाड़ मत बनाओ सब भूलकर गलती सुधारकर आगे काम शुरू करो।

54. जब लक्ष्मी तिलक करती हो, तब मुंह धोने नहीं जाना चाहिए।

अर्थ एवं प्रयोग : अवसर का सदुपयोग करना चाहिए।

क्लर्क की नौकरी का ऑफर आया तो तुम बोले अफसर बनूंगा और जॉइन नही किया, अब खाली बैठें हो ,जब लक्ष्मी तिलक

करती हो तब मुंह धोने नहीं जाना चाहिए।

55. लातों के भूत बातों से नहीं मानते।

अर्थ एवं प्रयोग : शरारती लोग समझाने से बस में नहीं आते।

रोहित को बहुत मना किया झगडे़ मै मत पड़ना अब पुलीस पकड़ के ले गई लातो के भूत बातो से नहीं मानते।

56. एक और एक ग्यारह |

अर्थ एवं प्रयोग : संगठित होने पर प्रभाव बढ़ जाता है

दो पार्टियों ने मिलकर सरकार बना ली इसे बोलते हैं एक और एक ग्यारह।

57. सीधी उंगली से घी नहीं निकलता।

अर्थ एवं प्रयोग : कभी-कभी काम करने के लिए तरीका बदलना जरूरी होता ।

जब सीधी उंगली से घी नहीं निकला तब उसने पुलिस में शिकायत कर दी |

58. जिनके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों पर पत्थर नहीं फ़ेंका करते।।

अर्थ एवं प्रयोग : कमियां सब में होती हैं।

हमारे घर के बच्चे भी शरारतें करते है तुमको उनके बच्चो की शिकायत नहीं करनी चाहिए। जिनके घर शीशे के होते हैं वह दूसरों

के घर पत्थर नहीं फेंका करते हैं।

59.आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया

अर्थ एवं प्रयोग : जरूरत से ज्यादा खर्चा करना।

वह बहुत गरीब है, ज्यादा लॉटरी लेना उसके लिए आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया जैसा काम है

60. काला अक्षर भैंस बराबर|

अर्थ एवं प्रयोग : पढ़ा लिखा न होना।

जर्मन का पत्र उसके लिए काला अक्षर भैंस बराबर है, कैसे पढ़कर सुनाएगा वो।

Leave a Reply

*

code