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किसी अपने का साथ छोड़ जाने के बाद भी अपने दुख को आखिर कैसे करें कम? जाने जीवन जीने के कुछ नए तरीके

जीवन-शैली, हिंदी

किसी अपने खास के गुजरने का ग़म काफी हृदय विदारक और बहुत दर्दनाक होता है। दुख एक प्रकार से नुकसान की ही प्राकृतिक प्रक्रिया होती है, दुख वह भावात्मक पीड़ा होती है, जो आप अपनी किसी चीज या किसी प्रिय व्यक्ति के चले जाने पर महसूस करते हैं। अक्सर किसी अपने के नुकसान का दर्द काफी भारी ही लगता है।

किसी अपने के गुजरने का दुख कई बार असहनीय हो सकता है, इस दुख का दर्द आपके शारीरिक स्वास्थ्य को भी बाधित कर सकता है। जिसकी वजह से आपको नींद आने, खाने या सीधा सोचना भी काफी मुश्किल हो जाता है, और यह सब हमारे हुए नुकसान की प्रतिक्रियाएं होती है, आपका नुकसान जितना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा, आपका दुख भी उतना ही ज्यादा तीव्र होगा।

किसी अपने को खोना है सबसे बड़ा दुख

किसी ऐसे व्यक्ति या ऐसी चीज जिससे आप बहुत ज्यादा प्यार करते हैं, उसको खो देना जीवन के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होता है, हो सकता है कि आप अपने किसी प्रियजन की मृत्यु से दुखी हों, जो कि अक्सर जीवन के सबसे बड़े दुख का कारण होता है। ऐसे दुख की घड़ी में दुख को कम करना बहुत ही आवश्यक हो जाता है। ऐसे समय में अपने दुख को कम करने के लिए हमें कुछ ऐसी चीजें करनी चाहिए जो कि हमारे दुख को बांटने का काम करे।

आ रही भावनाओं का लें अनुभव

अपने किसी प्रियजन को खो देने के बाद हमें लगभग उससे जुड़ी हुई सारी भावनाओं का हमारी कल्पना में आना स्वाभाविक है। ऐसे समय में हमें एक साथ कई सारी भावनाएं पकड़ने लगती हैं और हमें ऐसा लगता है कि हम जैसे पागल हो रहे हैं। जबकि ऐसा महसूस करना स्वाभाविक है कि जब हम एक साथ कई भावनाओं का अनुभव कर रहे हों। 

शोक के इस समय में अपने आप को याद दिलाना है काफी आवश्यक है कि भावनाएं आपकी ही हैं और वे भावनाएं सामान्य ही हैं। आपको यह याद रखना आवश्यक है आपने जिसको खो दिया है,यह उसके प्रति आपकी भावनाएं हैं इसलिए इसमें कुछ सही या गलत नहीं होता है। वक़्त के साथ सब सही हो जाता है।

कुछ लोगों का साथ रहना है जरूरी

जब आप किसी अपने को खो देते हैं तो कई बार ऐसा भी हो सकता है जब इस दुख को आप अकेले रहकर व्यतीत करना चाहते हो, ऐसे समय में यह बहुत ज्यादा जरूरी हो जाता है कि आपके आसपास कुछ ऐसे लोग रहें, जिनकी आपको आवश्यकता पड़ सकती है। चाहे वह आपके दोस्त हो सकते हैं, आपका परिवार या शायद वह एक चिकित्सक भी हो सकते हैं, जो आपके दुख के दौरान आपकी सहायता के लिए पहुंच सके। अगर जरूरत हो तो यह लोग आपका भावनात्मक सपोर्ट करने के साथ ही शारीरिक आवश्यकताओं को भी पूरा कर सकते हैं, हालांकि किसी अपने प्रियजन की मृत्यु जीवित व्यक्ति के जीवन में बहुत बड़ा स्थान रिक्त कर देती है, जो अस्थाई रूप से उन लोगों द्वारा भरने की कोशिश की जा सकती है।

अपने दुखों का करें अनुभव

यह समझना काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि हर व्यक्ति का हुए नुकसान से निपटने का अपना एक अलग तरीका होता है। आप अपने दुख पर कोई समय की सीमा नहीं लगा सकते हैं, आपके जीवन में जब भी दुख आते हैं, आपको स्वयं उन दुखों का अनुभव करते रहना चाहिए।

लेखक Elisabeth Kubler Ross ने अपनी पुस्तक On Death and Dying में दुख के पांच चरणों को बताया है, जिनमें से हर चरण अलग-अलग हैं, हालांकि यह आवश्यक नहीं है कि उसी क्रम में उनका अनुभव किया गया हो।

इनकार करना

शुरुआत में हो सकता है कि इसका अनुभव आपकी समझ से बाहर हो। आप यह विश्वास नहीं करना चाहते कि आपने अपने प्रियजन को खो दिया है, हो सकता है कि इस अनुभव से आप सुन्न हो जाएं। काफ़ी बार कई लोग अपना मानसिक संतुलन तक खो देते हैं और इस बात को स्वीकार ही नहीं कर पाते हैं कि सच में ये ऐसा हो गया है। इसीलिए इनकार करने की जगह वास्तविकता को स्वीकार करके अगर कोई व्यक्ति आगे बढ़ता है, तो इससे उसका दुख भरे ही पूरी तरह से ना कम हो, लेकिन काफ़ी हद तक आधा ज़रूर हो जाता है।

क्रोध महसूस करना

जैसे ही आपको स्थिति की सच्चाई समझ में आने लगती है वैसे ही क्रोध लगना और क्रोध का महसूस होना स्वाभाविक है। यह गुस्सा आप पर छोड़ा जा सकता है, आपके प्रियजन या डॉक्टर पर भी उपचार न करने के लिए, यहां तक कि भगवान पर भी।

सौदा करने का प्रयास करना

जीवित लोगों के लिए यह कोई असामान्य बात नहीं है कि वह आमतौर पर अपने उच्च शक्तियों से बातचीत कर हुए नुकसान की भरपाई करने की कोशिश करें। आप आश्चर्यचकित ना हो यदि आप खुद को भगवान के सामने खोए हुए प्रियजन के लिए सौदा करते हुए पाते हैं।

निराशा होना

अपनी किसी प्रियजन को खोने के बाद आपके द्वारा अत्यधिक उदासी महसूस करना सामान्य बात है और अधिकतर यह ज्यादा समय के लिए नहीं रहेगी। यह महसूस करना सामान्य बात है कि हमारा जीवन अब कभी ऐसा नहीं होगा।।

स्वीकार करना

दुख के इस अंतिम चरण को स्वीकृति कहा जाता है, यह चरण हुए नुकसान को स्वीकार कर जीवन में आगे बढ़ने के लिए संदर्भ में आता है। ऐसा नहीं है कि आप इन चरणों का दोबारा मूल्यांकन नहीं कर सकते बल्कि इससे आपको अपने दुख का सामना करने में आसानी हो सकती है।

हर इंसान, हर मुसीबत का अपने तरीके से सामना करता है और एक दिन आप भी यह पायेंगे कि दर्द कम है और जीवन चल सकता है। समय सबसे बड़ी औषधि होती है, और हर बड़ा से बड़ा घाव भी समय के साथ भर जाता है। इसीलिए, किसी अपने को खोने के बाद भी, खुद को थोड़ा सा समय दें और दिन आप खुद देखेंगे कि आपका दर्द काफ़ी मायनों में कम हो चुका होगा। तो, इन मुश्किल घड़ियों में भी सकारात्मक और सामान्य रहने की कोशिश करें, दुख धीरे-धीरे कम होता ही चला जाएगा।

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